Education 11th ch - 1 शिक्षा और मनोविज्ञान [Education & Psychology]

 शिक्षा और मनोविज्ञान [Education & Psychology]

अभ्यास (EXERCISE)
A. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short answer Type Questions):                                                                         5 marks.
1. मनोविज्ञान के विकास के विभिन्न अवस्थाओं का वर्णन कीजिए। (Describe the different stages of the development of Psychology.)
Ans:- मनोविज्ञान का विकास कई चरणों में हुआ है। संक्षेप में मुख्य अवस्थाएँ इस प्रकार हैं:
  1. दार्शनिक अवस्था
    • प्रारंभ में मनोविज्ञान दर्शन का भाग था।
    • आत्मा, चेतना और मन के स्वरूप पर विचार किया जाता था।
  2. संरचनात्मक अवस्था (Structuralism)
    • विलियम वुंट और टिचनर ने मनोविज्ञान को वैज्ञानिक रूप देने का प्रयास किया।
    • चेतना के घटकों (अनुभूति, संवेदना, विचार) का अध्ययन किया गया।
  3. क्रियात्मक अवस्था (Functionalism)
    • विलियम जेम्स ने मनोविज्ञान को व्यवहार और उसके उपयोगिता से जोड़ा।
    • यह देखा गया कि मानसिक प्रक्रियाएँ जीवन में कैसे सहायक होती हैं।
  4. व्यवहारवादी अवस्था (Behaviorism)
    • जॉन बी. वॉटसन और बी.एफ. स्किनर ने केवल प्रत्यक्ष व्यवहार का अध्ययन किया।
    • "उत्तेजना–प्रतिक्रिया" (Stimulus–Response) पर बल दिया गया।
  5. मानवतावादी एवं आधुनिक अवस्था
  • कार्ल रोजर्स और अब्राहम मास्लो ने मानव की संभावनाओं, आत्म-विकास और सकारात्मक दृष्टिकोण पर ध्यान दिया।
  • आधुनिक मनोविज्ञान में संज्ञानात्मक (Cognitive), सामाजिक, औद्योगिक, और अनुप्रयुक्त शाखाएँ विकसित हुईं|
2. शिक्षा और मनोविज्ञान के आपसी सम्बन्ध को दर्शाइए। (State the mutual relationship between Education and Psychology.)
Ans:- शिक्षा और मनोविज्ञान एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। संक्षेप में मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
  1. शिक्षण प्रक्रिया का आधार
    • मनोविज्ञान यह समझने में मदद करता है कि विद्यार्थी कैसे सीखते हैं और उनकी मानसिक क्षमताएँ क्या हैं।
  2. बालक का सर्वांगीण विकास
    • शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि व्यक्तित्व, भावनात्मक और सामाजिक विकास करना है, जिसे मनोविज्ञान दिशा देता है।
  3. अध्यापन विधियों का चयन
    • मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों के आधार पर शिक्षक उपयुक्त शिक्षण विधियाँ चुनते हैं।
  4. प्रेरणा और रुचि
    • मनोविज्ञान बताता है कि विद्यार्थी को सीखने के लिए कैसे प्रेरित किया जाए और उसकी रुचि कैसे बढ़ाई जाए।
  5. व्यक्तिगत भिन्नताएँ
  • हर विद्यार्थी अलग होता है। मनोविज्ञान इन भिन्नताओं को समझकर शिक्षा को अनुकूल बनाने में सहायक होता है
3. शिक्षा मनोविज्ञान के क्षेत्र का वर्णन कीजिए। (Describe the scope of Educational Psychology.)
Ans:- शिक्षा मनोविज्ञान का क्षेत्र बहुत व्यापक है। संक्षेप में इसके मुख्य क्षेत्र इस प्रकार हैं:
  1. बालक का विकास
    • शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक विकास का अध्ययन।
  2. अध्ययन की प्रक्रिया
    • सीखने के सिद्धांत, स्मृति, ध्यान, अभिप्रेरणा और समस्या-समाधान का विश्लेषण।
  3. अध्यापन विधियाँ
    • विभिन्न शिक्षण पद्धतियों का चयन और उनका प्रभाव।
  4. व्यक्तिगत भिन्नताएँ
    • विद्यार्थियों की रुचि, क्षमता, बुद्धि और व्यक्तित्व के अनुसार शिक्षा का अनुकूलन।
  5. अनुशासन और परामर्श
  • कक्षा प्रबंधन, व्यवहार सुधार तथा विद्यार्थियों को मार्गदर्शन देना| 
4. शिक्षा मनोविज्ञान के उद्देश्यों का वर्णन कीजिए। (Discuss the aims of educational psychology.)
Ans:- शिक्षा मनोविज्ञान का मुख्य उद्देश्य शिक्षा को अधिक प्रभावी और विद्यार्थी-केंद्रित बनाना है। इसके प्रमुख उद्देश्य इस प्रकार हैं:
  1. बालक को समझना
    • उसकी रुचि, क्षमता, बुद्धि, भावनाएँ और व्यक्तित्व का अध्ययन करना।
  2. अध्ययन की प्रक्रिया को स्पष्ट करना
    • सीखने के सिद्धांत, स्मृति, ध्यान और अभिप्रेरणा को समझना।
  3. शिक्षण विधियों का विकास
    • उपयुक्त अध्यापन पद्धतियों का चयन और प्रयोग करना।
  4. व्यक्तिगत भिन्नताओं का ध्यान रखना
    • हर विद्यार्थी की अलग-अलग आवश्यकताओं के अनुसार शिक्षा प्रदान करना।
  5. अनुशासन और मार्गदर्शन
  • कक्षा प्रबंधन, व्यवहार सुधार और विद्यार्थियों को उचित परामर्श देना
5. संवेदना के बारे में संक्षेप में लिखिए। (Write in short about Sensation?)
Ans:- संवेदना वह मानसिक प्रक्रिया है जिसके द्वारा हमारे इन्द्रियाँ (जैसे आँख, कान, नाक, त्वचा, जीभ) बाहरी उत्तेजनाओं को ग्रहण करती हैं और मस्तिष्क तक पहुँचाती हैं।

मुख्य बिंदु:

  1. परिभाषा – इन्द्रियों द्वारा बाहरी वस्तुओं या घटनाओं का प्रथम अनुभव संवेदना कहलाता है।
  2. स्रोत – दृष्टि, श्रवण, घ्राण, स्वाद और स्पर्श इन्द्रियाँ।
  3. विशेषता – यह सबसे प्रारंभिक मानसिक क्रिया है, जिसमें वस्तु का केवल कच्चा अनुभव होता है, व्याख्या नहीं।
  4. उदाहरण – आँखों से रंग देखना, कानों से ध्वनि सुनना, जीभ से स्वाद लेना।
  5. महत्व – संवेदना के बिना ज्ञान, अनुभव और सीखना संभव नहीं है|
6. संवेदना के विभिन्न प्रकारों का वर्णन कीजिए। (Describe the different types of Sensation.)
Ans:- संवेदना को मुख्यतः पाँच इन्द्रियों के आधार पर विभाजित किया जाता है। इनके प्रकार इस प्रकार हैं:
  1. दृष्टि संवेदना (Visual Sensation)
    • आँखों द्वारा प्रकाश, रंग, आकार और दूरी का अनुभव।
  2. श्रवण संवेदना (Auditory Sensation)
    • कानों द्वारा ध्वनि, स्वर, लय और तीव्रता का अनुभव।
  3. घ्राण संवेदना (Olfactory Sensation)
    • नाक द्वारा गंध और सुगंध का अनुभव।
  4. रसना संवेदना (Gustatory Sensation)
    • जीभ द्वारा स्वाद का अनुभव – मीठा, खट्टा, कड़वा, नमकीन आदि।
  5. स्पर्श संवेदना (Tactile Sensation)
  • त्वचा द्वारा गर्मी, ठंडक, दबाव, दर्द और कोमलता का अनुभव| 
7. संवेदना और प्रत्यक्षीकरण में अन्तर स्पष्ट कीजिए। (Analyse the difference between Sensation and Perception.)
Ans:- 

8. प्रत्यक्षीकरण के मुख्य विशेषताओं का वर्णन कीजिए। (Describe the chief features of Perception.)
Ans:- प्रत्यक्षीकरण वह मानसिक प्रक्रिया है जिसमें इन्द्रियों से प्राप्त संवेदनाओं को मस्तिष्क अर्थपूर्ण रूप में संगठित करता है। इसकी प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
  1. संगठित प्रक्रिया
    • प्रत्यक्षीकरण में विभिन्न संवेदनाओं को जोड़कर एक संपूर्ण अनुभव बनाया जाता है।
  2. अर्थपूर्णता
    • यह केवल अनुभव नहीं, बल्कि अनुभव को अर्थ और पहचान प्रदान करता है।
  3. वैयक्तिकता
    • हर व्यक्ति का प्रत्यक्षीकरण अलग हो सकता है क्योंकि यह उसकी रुचि, अनुभव और मानसिक अवस्था पर निर्भर करता है।
  4. सक्रिय प्रक्रिया
    • प्रत्यक्षीकरण केवल उत्तेजना ग्रहण करना नहीं, बल्कि मस्तिष्क द्वारा सक्रिय व्याख्या करना है।
  5. अनुभव पर आधारित
  • पूर्व अनुभव, ज्ञान और अपेक्षाएँ प्रत्यक्षीकरण को प्रभावित करती हैं|
9. प्रत्यक्षीकरण का शिक्षा में क्या महत्त्व है? (What is the importance of Perception in education?)
Ans:- प्रत्यक्षीकरण (Perception) शिक्षा की प्रक्रिया में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके प्रमुख महत्त्व इस प्रकार हैं:
  1. सीखने की नींव
    • विद्यार्थी बाहरी वस्तुओं और घटनाओं को पहले प्रत्यक्षीकरण के माध्यम से समझते हैं। यह ज्ञान की प्रारंभिक सीढ़ी है।
  2. अर्थपूर्ण अनुभव
    • केवल संवेदना पर्याप्त नहीं होती; प्रत्यक्षीकरण से अनुभव को अर्थ और पहचान मिलती है, जिससे शिक्षा प्रभावी बनती है।
  3. रुचि और प्रेरणा
    • जब विद्यार्थी किसी विषय को स्पष्ट रूप से देख और समझ पाते हैं, तो उनकी रुचि और सीखने की प्रेरणा बढ़ती है।
  4. सटीक समझ
    • प्रत्यक्षीकरण से वस्तुओं, घटनाओं और अवधारणाओं की सही पहचान होती है, जो शिक्षा को व्यावहारिक बनाती है।
  5. व्यक्तिगत भिन्नताओं का ध्यान
  • हर विद्यार्थी का प्रत्यक्षीकरण अलग होता है; शिक्षक इसे समझकर शिक्षा को अनुकूल बना सकते हैं|
10. संप्रत्यय के बारे में संक्षेप में लिखिए। (Write in short about Conception.)
Ans:- संप्रत्यय वह मानसिक प्रक्रिया है जिसके द्वारा हम किसी वस्तु, घटना या विचार को सामान्य रूप में समझते हैं और उसका एक सामान्यीकृत रूप बना लेते हैं।

मुख्य बिंदु:

  1. परिभाषा – जब हम अनेक वस्तुओं या अनुभवों की समान विशेषताओं को पहचानकर उनका एक सामान्य मानसिक रूप बनाते हैं, उसे संप्रत्यय कहते हैं।
  2. स्वरूप – यह विचार का उच्च स्तर है, जिसमें वस्तुओं को वर्गीकृत और व्यवस्थित किया जाता है।
  3. उदाहरण – "फल" का संप्रत्यय आम, केला, सेब आदि सभी को एक समूह में रखता है।
  4. महत्व – संप्रत्यय से सोचने, समझने और सीखने की प्रक्रिया सरल होती है।
  5. शिक्षा में उपयोगिता – विद्यार्थियों को विषयों को वर्गीकृत और व्यवस्थित रूप से समझाने में सहायक|
11. संप्रत्यय के महत्त्व का वर्णन कीजिए। (Describe the importance of Conception.)
Ans:- संप्रत्यय शिक्षा और मानसिक विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके प्रमुख महत्त्व इस प्रकार हैं:
  1. सोचने और समझने में सहायक
    • संप्रत्यय वस्तुओं और घटनाओं को वर्गीकृत कर सोचने की प्रक्रिया को सरल बनाता है।
  2. ज्ञान का संगठन
    • यह विभिन्न अनुभवों को व्यवस्थित कर ज्ञान को संगठित रूप देता है।
  3. सीखने की सुविधा
    • संप्रत्यय के माध्यम से विद्यार्थी विषयों को सामान्यीकृत रूप में आसानी से सीखते हैं।
  4. समस्या-समाधान में सहायक
    • संप्रत्यय से वस्तुओं और विचारों की पहचान स्पष्ट होती है, जिससे समस्याओं का समाधान सरल होता है।
  5. शिक्षा में उपयोगिता
  • शिक्षक संप्रत्ययों के माध्यम से विद्यार्थियों को विषयों को वर्गीकृत और व्यवस्थित रूप से समझा सकते हैं|
12. व्यवहारवाद की विशेषताओं का वर्णन कीजिए। (Describe the features of Behaviourism.)
Ans:- व्यवहारवाद मनोविज्ञान का एक प्रमुख दृष्टिकोण है, जिसका विकास जॉन बी. वॉटसन और बी.एफ. स्किनर ने किया। इसकी मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
  1. प्रेक्षणीय व्यवहार पर बल
    • केवल वही अध्ययन योग्य है जिसे प्रत्यक्ष रूप से देखा और मापा जा सके।
  2. उत्तेजना–प्रतिक्रिया (Stimulus–Response) संबंध
    • व्यवहार को बाहरी उत्तेजना और उसकी प्रतिक्रिया के रूप में समझा जाता है।
  3. अनुभवजन्य दृष्टिकोण
    • प्रयोग और अनुभव के आधार पर व्यवहार का अध्ययन किया जाता है।
  4. सीखने पर जोर
    • व्यवहारवाद के अनुसार सीखना ही व्यवहार में परिवर्तन है।
  5. मानसिक प्रक्रियाओं की उपेक्षा
  • चेतना, विचार और भावनाओं को वैज्ञानिक अध्ययन का विषय नहीं माना गया|
13. व्यवहारवाद की सीमाओं का वर्णन कीजिए। (Discuss the limitation of Bahaviourism.)
Ans:- व्यवहारवाद की सीमाएँ : 
  1. मानसिक प्रक्रियाओं की उपेक्षा – व्यवहारवाद केवल प्रत्यक्ष व्यवहार पर ध्यान देता है, जबकि सोच, भावनाएँ और प्रेरणा जैसी आंतरिक मानसिक प्रक्रियाओं को नज़रअंदाज़ करता है।
  2. यांत्रिक दृष्टिकोण – यह मनुष्य को मशीन की तरह मानता है, जहाँ उत्तेजना (Stimulus) और प्रतिक्रिया (Response) पर ही ज़ोर दिया जाता है।
  3. रचनात्मकता और व्यक्तित्व की अनदेखी – व्यवहारवाद व्यक्तिगत भिन्नताओं, रचनात्मकता और आत्म-अभिव्यक्ति को महत्व नहीं देता।
  4. सीखने की सीमित व्याख्या – जटिल सीखने की प्रक्रियाएँ जैसे भाषा अधिग्रहण, समस्या-समाधान और उच्च-स्तरीय सोच को यह पूरी तरह समझा नहीं पाता।
  5. सामाजिक-सांस्कृतिक कारकों की उपेक्षा – यह सीखने और व्यवहार पर समाज, संस्कृति और मानवीय संबंधों के प्रभाव को पर्याप्त महत्व नहीं देता|
14. व्यवहारवाद की आलोचना किन रूपों में की जाती है? (In what way is behaviorism criticized?)
Ans:- ✍️ व्यवहारवाद की आलोचना :
  1. मानसिक प्रक्रियाओं की अनदेखी – आलोचकों का कहना है कि व्यवहारवाद केवल बाहरी व्यवहार पर ध्यान देता है और सोच, भावनाएँ व प्रेरणा जैसी आंतरिक प्रक्रियाओं को नज़रअंदाज़ करता है।
  2. यांत्रिक दृष्टिकोण – यह मनुष्य को मशीन की तरह मानता है, जहाँ केवल उत्तेजना (Stimulus) और प्रतिक्रिया (Response) पर ज़ोर दिया जाता है।
  3. सीखने की अपूर्ण व्याख्या – भाषा अधिग्रहण, समस्या-समाधान और रचनात्मकता जैसी जटिल सीखने की प्रक्रियाओं को व्यवहारवाद पूरी तरह समझा नहीं पाता।
  4. व्यक्तिगत भिन्नताओं की उपेक्षा – यह मानता है कि सभी व्यक्ति समान परिस्थितियों में समान प्रतिक्रिया देंगे, जबकि वास्तविकता में व्यक्तिगत अंतर महत्वपूर्ण होते हैं।
  5. सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभावों की कमी – आलोचना होती है कि व्यवहारवाद समाज, संस्कृति और मानवीय संबंधों के प्रभाव को पर्याप्त महत्व नहीं देता|
15. शिक्षा में गेस्टाल्ट के नियमों का वर्णन कीजिए। (Describe Gestalt principle in education.)
Ans:- गेस्टाल्ट मनोविज्ञान के अनुसार सीखना केवल अलग-अलग तत्वों का जोड़ नहीं है, बल्कि संपूर्णता (Whole) का अनुभव है। शिक्षा में इसके प्रमुख नियम इस प्रकार हैं:
  1. निकटता का नियम (Law of Proximity) – पास-पास रखी वस्तुएँ या विचार एक समूह के रूप में समझे जाते हैं। शिक्षा में संबंधित विषयों को साथ पढ़ाने से समझ आसान होती है।
  2. समानता का नियम (Law of Similarity) – समान आकृतियाँ या विचार एक ही श्रेणी में आते हैं। पढ़ाई में समान उदाहरणों को जोड़कर समझाना प्रभावी होता है।
  3. पूर्णता का नियम (Law of Closure) – अधूरी वस्तु को भी मनुष्य पूर्ण रूप में देखता है। शिक्षा में छात्र अपूर्ण जानकारी को भी अपने अनुभव से पूरा करने का प्रयास करते हैं।
  4. अविरतता का नियम (Law of Continuity) – निरंतरता में प्रस्तुत वस्तुएँ या विचार एक साथ समझे जाते हैं। शिक्षा में क्रमबद्ध और सतत् अध्ययन से सीखना स्थायी होता है।
  5. आकृति-भूमि का नियम (Figure-Ground Rule) – किसी वस्तु को पृष्ठभूमि से अलग करके देखा जाता है। शिक्षा में मुख्य विषय को स्पष्ट रूप से अलग दिखाना आवश्यक है|
16. कोहलर के झूलते केले का प्रयोग क्या है? (What is Kohler's experiment of Hanging Banana?)
Ans:- गेस्टाल्ट मनोवैज्ञानिक कोहलर ने चिंपैंज़ी पर कई प्रयोग किए। उनमें से एक प्रसिद्ध प्रयोग "झूलते केले का प्रयोग" है।
  1. प्रयोग की स्थिति – कोहलर ने एक कमरे में छत से केले लटकाए। ज़मीन पर डिब्बे रखे थे, लेकिन केले इतनी ऊँचाई पर थे कि सीधे हाथ से नहीं पहुँच सकते थे।
  2. चिंपैंज़ी की समस्या – बंदर ने पहले कई बार सीधे केले पकड़ने की कोशिश की, लेकिन असफल रहा।
  3. अंतरदृष्टि (Insight) – कुछ समय बाद चिंपैंज़ी ने अचानक समझ लिया कि डिब्बों को एक-दूसरे पर रखकर ऊँचाई बढ़ाई जा सकती है। उसने डिब्बे जमाए और उन पर चढ़कर केले निकाल लिए।
  4. निष्कर्ष – इस प्रयोग से पता चला कि सीखना केवल प्रयास और भूल (Trial and Error) से नहीं होता, बल्कि अंतरदृष्टि (Insight Learning) से भी होता है।
  5. शैक्षिक महत्व – शिक्षा में छात्रों को समस्याओं को समझने और समाधान खोजने का अवसर देना चाहिए, ताकि वे स्वयं अंतरदृष्टि विकसित कर सकें|
17. कोहलर के प्रयोगों का शिक्षा और मनोविज्ञान में क्या महत्त्व है? (What is the importance of Kohler's experiment in Education and Psychology?)
Ans:- कोहलर के प्रयोगों का शिक्षा और मनोविज्ञान में महत्त्व :
  1. अंतरदृष्टि (Insight) पर बल – कोहलर ने दिखाया कि सीखना केवल प्रयास और भूल (Trial & Error) से नहीं होता, बल्कि अचानक समस्या का समाधान समझ आने से भी होता है।
  2. समस्या-समाधान कौशल का विकास – शिक्षा में छात्रों को अवसर देना चाहिए कि वे स्वयं सोचकर समस्याओं का समाधान खोजें। इससे रचनात्मकता और तार्किक क्षमता बढ़ती है।
  3. समग्र दृष्टिकोण (Holistic Approach) – गेस्टाल्ट सिद्धांत के अनुसार सीखना संपूर्णता में होता है। शिक्षा में विषयों को जोड़कर पढ़ाना अधिक प्रभावी होता है।
  4. प्रेरणा और रुचि का महत्त्व – कोहलर के प्रयोग बताते हैं कि जब छात्र की रुचि और प्रेरणा जुड़ी होती है, तो वह जल्दी और गहराई से सीखता है।
  5. मनोविज्ञान में योगदान – इन प्रयोगों ने यह सिद्ध किया कि व्यवहारवाद से अलग, मानसिक प्रक्रियाएँ (सोच, समझ, अंतर्दृष्टि) भी सीखने में निर्णायक भूमिका निभाती हैं|
18. मनोविज्ञान की प्रक्रिया का वर्णन कीजिए। (Describe the process of Psychoanalysis.)
Ans:- मनोविज्ञान में मानव व्यवहार और मानसिक क्रियाओं को समझने के लिए एक व्यवस्थित प्रक्रिया अपनाई जाती है। इसके मुख्य चरण इस प्रकार हैं:
  1. समस्या की पहचान (Identification of Problem) – सबसे पहले अध्ययन के लिए व्यवहार या मानसिक स्थिति को स्पष्ट किया जाता है।
  2. पर्यवेक्षण (Observation) – व्यक्ति के व्यवहार, प्रतिक्रियाओं और परिस्थितियों का सूक्ष्म निरीक्षण किया जाता है।
  3. डेटा संग्रह (Data Collection) – प्रयोग, साक्षात्कार, प्रश्नावली आदि विधियों से आवश्यक जानकारी एकत्र की जाती है।
  4. विश्लेषण (Analysis) – प्राप्त आंकड़ों का वैज्ञानिक ढंग से विश्लेषण कर निष्कर्ष निकाला जाता है।
  5. निष्कर्ष और अनुप्रयोग (Conclusion & Application) – अध्ययन से प्राप्त निष्कर्षों को शिक्षा, परामर्श, उद्योग और समाज में लागू किया जाता है|
19. मनोविज्ञान के जाँच के विभिन्न विधियों का संक्षेप में वर्णन कीजिए। (Discuss in brief the different method of Enquiry in Psychology.)
Ans:- मनोविज्ञान में मानव व्यवहार और मानसिक प्रक्रियाओं को समझने के लिए कई वैज्ञानिक विधियाँ प्रयोग की जाती हैं। संक्षेप में प्रमुख विधियाँ इस प्रकार हैं:
  1. पर्यवेक्षण विधि (Observation Method) – व्यक्ति के व्यवहार को प्राकृतिक या नियंत्रित परिस्थितियों में देखकर अध्ययन किया जाता है।
  2. प्रयोग विधि (Experimental Method) – नियंत्रित वातावरण में चर (Variables) बदलकर उनके प्रभाव का अध्ययन किया जाता है।
  3. साक्षात्कार विधि (Interview Method) – व्यक्ति से सीधे प्रश्न पूछकर उसकी भावनाओं, विचारों और अनुभवों को जाना जाता है।
  4. प्रश्नावली विधि (Questionnaire Method) – लिखित प्रश्नों के माध्यम से बड़ी संख्या में व्यक्तियों से जानकारी प्राप्त की जाती है।
  5. प्रकरण अध्ययन विधि (Case Study Method) – किसी एक व्यक्ति या समूह का गहन अध्ययन कर उसके व्यवहार और व्यक्तित्व को समझा जाता है|

B. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Type Questions)                                                                          2 Marks
1. शिक्षा के संकुचित अर्थ से क्या तात्पर्य है? (What is meant by narrow meaning of education?)
2. स्वामी विवेकानन्द के अनुसार शिक्षा क्या है? (What is education according to Swami Vivekanand?)
3. रवीन्द्रनाथ टैगोर ने शिक्षा की परिभाषा किस रूप में दी है? (How has Rabindranath Tagore defined education?)
4. प्लेटो के अनुसार शिक्षा क्या है? (What is education according to plato?)
5. मनोविज्ञान का व्युत्पत्ति के आधार पर अर्थ क्या है? (What is the etymological meaning of education?)
6. स्किनर ने मनोविज्ञान की परिभाषा किस रूप में दी है? (How has Skinner defined education?)
7. शिक्षा और मनोविज्ञान के बीच सम्बन्धों का उल्लेख कीजिए। (Mention the relation between education and Psychology?)
8. ड्रेवर ने शिक्षा मनोविज्ञान की परिभाषा किस रूप में दी है? (How has Draver defined educational Psychology?)
9. शिक्षा मनोविज्ञान के किसी दो क्षेत्र का वर्णन कीजिए। (Mention any two scope of educational psychology.)
10. शिक्षा मनोविज्ञान के किसी दो उद्देश्यों का वर्णन कीजिए। (Discuss any two aims of educational Psychology.)
11. संवेदना से क्या तात्पर्य है? (What is meant by Sensation?)
12. संवेदना के किन्हीं दो प्रकारों का वर्णन कीजिए। (Describe any two types of Sensation.)
13. व्यक्तिगत संवेदना से क्या तात्पर्य है? (What is meant by Pesonal Sensation?)
14. राजनैतिक संवेदना से क्या तात्पर्य है? (What is meant by Political Sensation?)
15. सांस्कृतिक संवेदना से क्या तात्पर्य है ? (What is meant by Cultural Sensation?)
16. प्रत्यक्षीकरण से क्या तात्पर्य है? (What is meant by Perception?)
17. संवेदना और प्रत्यक्षीकरण के बीच किन्हीं दो अन्तर को स्पष्ट कीजिए। (Mention any two difference of Sensation and perception.)
18. प्रत्यक्षीकरण की किन्हीं दो विशेषताओं का वर्णन कीजिए। (Mention any two features of perception.)
19. प्रत्यक्षीकरण के दो महत्त्वों को लिखिए। (Write any two importance of Perception.)
20. संप्रत्यय का अर्थ क्या है? (What is meaning of Conception?)
21. संप्रत्यय की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं? (What is chief features of Conception?)
22. शिक्षा का शाब्दिक अर्थ क्या है? (What is the etymological meaning of education?)
23. शिक्षा का व्यापक अर्थ से आप क्या समझते हैं? (What do you understand by wider meaning of education)
24. संप्रत्यय के किन्हीं दो अवस्थाओं का वर्णन कीजिए। (Describe any two stages of conception?)
25. संप्रत्यय के किन्हीं दो महत्त्व का उल्लेख कीजिए। (Mention any two importance of conception?)
26. व्यवहारवाद से आप क्या समझते हो ? (What do you understand by Behaviourism?)
27. व्यवहारवाद की उत्पत्ति के क्या कारण थे? (What were the causes of origin of Behaviouralism?)
28. व्यवहारवाद की किन्हीं दो विशेषताओं का उल्लेख कीजिए। (Mention any two features of Behaviourism.)
29. व्यवहारवाद के दो सीमाओं का उल्लेख कीजिए। (Mention any two limitation of Behaviourism.)
30. व्यवहारवाद की आलोचना क्यों की जाती है? (Why is behaviourism criticized?)
31. गेस्टाल्ट के सिद्धान्त से क्या तात्पर्य है? (What is meant by Gestalt Principles?)
32. शिक्षा में गेस्टाल्ट का क्या उपयोग है? (What are the uses of Gestalt in education?)
33. समस्या-समाधान सिद्धान्त से आप क्या समझते हैं? (What do you understand by problem-solving principle?)
34. गेस्टाल्ट के किसी एक उदाहरण का वर्णन कीजिए। (Describe any one example of Gestalt?)
35. गेस्टाल्ट का दो लाभ बताइए। (State any two benefit of Gestalt?)
36. मनोविश्लेषण से आप क्या समझते हैं? (What do you understand by psychoanalysis?)
37. फ्रायड के मनोविश्लेषण के सिद्धान्त से क्या तात्पर्य है? (What is meant by Freud's Principles of Psychoanalysis?)
38. मनोविज्ञान के किन्हीं दो जाँच विधि का उल्लेख कीजिए। (Mention any two enquiry method of Psychology.)
39. अवलोकन के किन्हीं दो प्रकार का नाम बताओ। (Name any two types of observation.)
40. मामलों के किन्हीं दो प्रकार का नाम बताइए। (Name any two types of Case-study.)

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